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'निहत्थे कश्मीरियों को खून से नहला दिया', पाकिस्तान पर भड़के MQM नेता अल्ताफ हुसैन

 Written By: Vineet Kumar Singh @VickyOnX
 Published : Jul 30, 2026 08:46 am IST,  Updated : Jul 30, 2026 08:46 am IST

MQM के नेता अल्ताफ हुसैन ने पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की निंदा की है। उन्होंने पाकिस्तान सरकार पर निहत्थे कश्मीरियों के दमन, मीडिया कवरेज रोकने और अधिकार मांगने वालों पर बल प्रयोग का आरोप लगाया है।

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एमक्यूएम नेता अल्ताफ हुसैन। Image Source : ANI

Highlights

  • PoJK में कार्रवाई पर अल्ताफ हुसैन का हमला, बोले- निहत्थे कश्मीरियों पर बरसाईं गोलियां।
  • MQM नेता ने कहा- 79 साल कश्मीर के नाम पर राजनीति हुई, अब हक मांगने वालों पर हो रही फायरिंग।
  • JAAC का दावा- 5 जून से 28 जुलाई तक हुई 67 प्रदर्शनकारियों की मौत।

लंदन: पाकिस्तान की मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट यानी कि MQM के संस्थापक और नेता अल्ताफ हुसैन ने पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में प्रदर्शन कर रहे कश्मीरियों पर हुई कार्रवाई को लेकर पाकिस्तान सरकार और सुरक्षा बलों की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि बेगुनाह कश्मीरियों की मौत और उनके घायल होने की घटनाएं बेहद दुखद हैं और पाकिस्तान की पुलिस व सुरक्षा बलों ने अपने अधिकारों की मांग कर रहे निहत्थे लोगों पर बेरहमी से गोलियां चलाईं। बता दें कि अल्ताफ हुसैन का एक वीडियो काफी वायरल हुआ था, जिसमें वह मशहूर शायर अल्लामा इकबाल का लिखा गीत 'सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा' गाते हुए दिखाई दिए थे।

'सरकार मांगें सुनने के बजाय गोलियां चला रही है'

सोशल मीडिया पर आयोजित एक इमरजेंसी मीटिंग को संबोधित करते हुए अल्ताफ हुसैन ने कहा कि कश्मीरी कई दिनों से अपने बुनियादी अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन उनकी मांगें मानने के बजाय पाकिस्तान की सरकार उनके खिलाफ बल प्रयोग कर रही है। उन्होंने कहा,

'कश्मीरियों का खून बेरहमी से बहाया जा रहा है। पाकिस्तान ने कश्मीरियों पर अत्याचार की सारी हदें पार कर दी हैं। सैकड़ों कश्मीरी अब तक मारे जा चुके हैं या घायल हुए हैं।'

बता दें कि अल्ताफ हुसैन अपनी जान के खतरे और पाकिस्तानी सेना व सरकार के दमन के चलते 1992 में देश छोड़कर लंदन भाग गए थे और तब से निर्वासन में वहीं रह रहे हैं।

'निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर सेना ने की फायरिंग'

अल्ताफ हुसैन ने कहा कि जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के बुलावे पर रावलाकोट, मीरपुर और अन्य इलाकों में हुए प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और सुरक्षा बलों ने निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की। उनके मुताबिक, कई शहरों की सड़कों पर शव और घायल लोग पड़े रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि सुरक्षा बल कई शवों और घायलों को अपने साथ ले गए। इतना ही नहीं, अस्पतालों पर भी कब्जा कर लिया गया और घायलों का इलाज नहीं होने दिया गया। अल्ताफ हुसैन ने कहा कि शांतिपूर्ण धरने पर बैठे निहत्थे कश्मीरियों पर अंधाधुंध फायरिंग कर उन्हें 'खून से नहला दिया गया।'

'79 साल तक कश्मीर के नाम पर पैसा लिया'

अल्ताफ हुसैन ने पाकिस्तान के शासकों और सरकारी संस्थानों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पिछले 79 वर्षों से कश्मीर के नाम पर दुनिया भर से अरबों-खरबों डॉलर जुटाए गए। लोगों को 'कश्मीर बनेगा पाकिस्तान' का नारा देकर गुमराह किया गया, लेकिन आज जब कश्मीरी अपने अधिकार मांग रहे हैं तो उन्हें गोलियों से जवाब दिया जा रहा है। उन्होंने सवाल किया,

'क्या कश्मीरियों का खून बहाकर पाकिस्तान को एकजुट रखा जा सकता है? क्या इस तरह कश्मीरियों की आवाज दबाई जा सकती है?'

'वीडियो और तस्वीरें देखकर मेरा दिल रो पड़ा'

अल्ताफ हुसैन ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को निर्देश दिए कि कश्मीर में हो रही घटनाओं की रिपोर्टिंग न की जाए, ताकि दुनिया तक वहां के हालात न पहुंच सकें। उन्होंने कहा, 'अंतरराष्ट्रीय मीडिया और सोशल मीडिया पर सामने आ रहे वीडियो और तस्वीरें देखकर मेरा दिल रो पड़ा। खुदा के लिए बेगुनाह कश्मीरियों का खून बहाना बंद करें। वहां हो रहे अत्याचार रोकें और कश्मीरियों को उनके अधिकार दें।' अल्ताफ हुसैन ने फायरिंग में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि भी दी और उनके परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि MQM इस दुख की घड़ी में उनके साथ खड़ी है।

बातचीत विफल होने के बाद बढ़ा आंदोलन

बता दें कि JAAC ने 27 जुलाई को दोपहर 1 बजे तक सरकार को अपनी मांगें मानने का अल्टीमेटम दिया था। संगठन ने चेतावनी दी थी कि यदि आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया तो हजारों लोग रावलाकोट से मुजफ्फराबाद तक मार्च करेंगे। जब सरकार और JAAC के बीच बातचीत बेनतीजा रही तो हजारों लोग रावलाकोट में जुटे और मुजफ्फराबाद की ओर मार्च शुरू कर दिया। इसके बाद पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की। JAAC का दावा है कि 5 जून से 28 जुलाई के बीच मरने वालों की संख्या बढ़कर 67 हो गई है, हालांकि मीडिया रिपोर्ट्स में 30 से ज्यादा लोगों की मौत कंफर्म की गई है।

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